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*मुंगेर में ड्रोन से अवैध हथियार कारोबार पर प्रहार, जंगल-दियारा में छिपी फैक्ट्रियां उजागर*

On: April 10, 2026 11:20 PM
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*मुंगेर में ड्रोन से अवैध हथियार कारोबार पर प्रहार, जंगल-दियारा में छिपी फैक्ट्रियां उजागर*

मुंगेर। अवैध हथियार निर्माण के लिए कुख्यात मुंगेर में अब पुलिस ने तस्करों के खिलाफ हाईटेक रणनीति अपनाई है। पहाड़, जंगल और दियारा जैसे दुर्गम इलाकों में फल-फूल रहे मिनी गन फैक्ट्री के नेटवर्क पर अब ड्रोन से सटीक प्रहार किया जा रहा है। इस नई तकनीक के इस्तेमाल से पुलिस को बड़ी सफलता मिल रही है और तस्करों के सुरक्षित ठिकाने उजागर हो रहे हैं। अब तक उत्पाद विभाग ड्रोन के जरिए जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध शराब बनाने वालों पर कार्रवाई करता था, लेकिन हाल के महीनों में पुलिस ने इसी तकनीक का इस्तेमाल हथियार तस्करों के खिलाफ भी शुरू कर दिया है। ड्रोन से मिले इनपुट के आधार पर कई स्थानों पर छापेमारी कर अवैध हथियार निर्माण के अड्डों का पर्दाफाश किया गया है। दुर्गम इलाकों में छिपे ठिकानों तक पहुंच आसान अब तक तस्कर गिरफ्तारी से बचने के लिए घने जंगलों, मकई के खेतों, गंगा किनारे दियारा और पहाड़ी इलाकों को अपना ठिकाना बनाते थे। इन स्थानों तक पहुंचना पुलिस के लिए काफी चुनौतीपूर्ण था। कई बार सटीक सूचना मिलने के बावजूद भौगोलिक कठिनाइयों के कारण कार्रवाई अधूरी रह जाती थी। तस्कर इसी का फायदा उठाकर लंबे समय से अवैध हथियार निर्माण का धंधा चला रहे थे।अब ड्रोन कैमरों की मदद से इन इलाकों की निगरानी आसान हो गई है। आसमान से ली गई तस्वीरों और वीडियो के जरिए संदिग्ध गतिविधियों की सटीक जानकारी मिल रही है, जिससे पुलिस तुरंत कार्रवाई कर पा रही है। *लगातार हो रही कार्रवाई, तस्करों में हड़कंप* पुलिस अधीक्षक इमरान मसूद ने बताया कि हाल के दिनों में दियारा, पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में कई अवैध हथियार निर्माण इकाइयों का भंडाफोड़ किया गया है। उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक के उपयोग से अब ऐसे स्थानों की पहचान तेजी से हो रही है, जहां पहले पहुंचना मुश्किल था। इससे अवैध हथियार कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिल रही है। ड्रोन निगरानी शुरू होने के बाद तस्करों में हड़कंप मच गया है। अब उन्हें यह डर सता रहा है कि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। कई तस्कर अपने ठिकाने बदलने को मजबूर हो गए हैं। *तकनीकी मैकेनिज्म से मजबूत हो रही कार्रवाई* मुंगेर पुलिस अब आधुनिक तकनीकी मैकेनिज्म का प्रभावी उपयोग कर रही है। ड्रोन के जरिए रियल टाइम निगरानी के साथ-साथ संदिग्ध गतिविधियों की रिकॉर्डिंग भी की जा रही है। इससे न सिर्फ छापेमारी को सटीक बनाया जा रहा है, बल्कि मजबूत साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं, जिससे आरोपियों के खिलाफ केस मजबूत हो सके। यह रणनीति पूरे नेटवर्क को तोड़ने में कारगर साबित हो रही है।
*केस स्टडी : 1*
तीन मार्च 2026 को एसटीएफ और जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने मुफस्सिल थाना क्षेत्र के तौफीर दियारा में ड्रोन की मदद से संचालित मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। छापेमारी के दौरान दो तैयार पिस्टल, एक अर्धनिर्मित पिस्टल, एक मैगजीन और ड्रिल मशीन सहित कई उपकरण बरामद किए गए। इस दौरान एक तस्कर को गिरफ्तार किया गया।
*केस स्टडी : 2*
एक अप्रैल 2026 को एसटीएफ और मुफस्सिल थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए तौफीर दियारा इलाके में एक और मिनी गन फैक्ट्री पकड़ी।इस कार्रवाई में एक कारीगर गिरफ्तार हुआ, जबकि दो तैयार पिस्तौल, एक अर्धनिर्मित पिस्तौल और तीन मैगजीन के साथ हथियार बनाने के उपकरण बरामद किए गए।
*केस स्टडी : 3*
26 दिसंबर 2025 को पुलिस और एसटीएफ ने ड्रोन कैमरे की मदद से गंगा पार दियारा क्षेत्र में संचालित मिनी गन फैक्ट्री का पर्दाफाश किया। सटीक लोकेशन मिलने के बाद गठित विशेष टीम ने छापेमारी कर तीन कारीगरों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई को अवैध हथियार नेटवर्क पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है। *अपराध नेटवर्क पर बड़ा असर* ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल से मुंगेर में अवैध हथियार निर्माण के नेटवर्क पर बड़ा असर पड़ा है। पुलिस की इस रणनीति से तस्करों के लिए अब सुरक्षित ठिकाने ढूंढना मुश्किल होता जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में इस तकनीक के व्यापक उपयोग से अवैध हथियार कारोबार पर और प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाया जा सकेगा।

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